यूनिकोड क्या है ? Unicode Kya Hai ?

आज का युग सूचना और तकनीक का युग है। कंप्यूटर, स्मार्टफोन और इंटरनेट ने हमारे जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। शिक्षा, प्रशासन, व्यापार, संचार, पत्रकारिता और साहित्य—हर जगह डिजिटल तकनीक का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि हमारी भाषाएँ भी तकनीकी विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। हिंदी जैसी समृद्ध और व्यापक भाषा के लिए यह आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण है। इसी संदर्भ में यूनीकोड का आगमन एक ऐतिहासिक और क्रान्तिकारी परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है। आज इस लेख के माध्यम से हम विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे कि यूनिकोड क्या है ? Unicode Kya Hai ?

एक समय था जब कंप्यूटर पर हिंदी लिखने और पढ़ने के लिए अलग-अलग फॉन्ट तथा विशेष सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना पड़ता था। एक कंप्यूटर पर तैयार की गई हिंदी सामग्री दूसरे कंप्यूटर में सही रूप से दिखाई दे, यह भी सुनिश्चित नहीं होता था। इससे हिंदी के डिजिटल प्रसार में अनेक तकनीकी बाधाएँ उत्पन्न होती थीं। यूनीकोड ने इन समस्याओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया और हिंदी को वैश्विक डिजिटल मंच पर एक मजबूत आधार प्रदान किया।

आज हम मोबाइल पर हिंदी में संदेश लिखते हैं, इंटरनेट पर हिंदी सामग्री पढ़ते हैं, Google पर हिंदी में जानकारी खोजते हैं, ई-मेल भेजते हैं, ब्लॉग और वेबसाइट बनाते हैं तथा सोशल मीडिया पर हिंदी में संवाद करते हैं। इन सभी कार्यों को सहज और व्यापक बनाने में यूनीकोड की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस लेख में हम यूनीकोड की संकल्पना, तकनीकी आधार, हिंदी टाइपिंग में इसकी उपयोगिता, विभिन्न कीबोर्ड विकल्पों तथा दैनिक जीवन और सरकारी कार्यों में इसके महत्व को सरल भाषा में समझेंगे।

यूनीकोड  एक कंप्यूटर प्रोग्राम है, जो हमारे द्वारा की-बोर्ड से टाइप किए गये प्रत्‍येक अक्षर को एक विशेष कोड या नम्‍बर प्रदान करता है।  हम इंटरनेट पर जो भी लेख हिंदी में लिखा हुआ देखते हैं अथवा इंटरनेट पर जो भी सामग्री हिंदी में उपलब्ध है वह सब यूनीकोड  के माध्यम से ही लिखे और टाइप किए जाते हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि सभी प्रकार के सॉफ्टवेयर में अथवा किसी भी भाषा में यूनीकोड  का प्रयोग किया जा सकता है।

यूनीकोड  Unicode को दुनिया भर के कम्‍प्‍यूटरों में प्रयोग किया जा रहा है। यूनीकोड  में टाइप की गई पाठ्य सामग्री या विषयवस्तु को कहीं भी ले जाने पर उसका स्‍वरूप नहीं बदलता है, वह पूरी दुनिया में कहीं भी पढ़ी जा सकती है । इसके लिए प्रत्येक सिस्टम में यूनीकोड  सक्रिय (Activate) किया जाना आवश्यक है ।  यूनीकोड  से टाइप करने की सुविधा विश्‍व की अधिकांश भाषाओं में उपलब्ध है। भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में जो 22 भारतीय भाषाएँ शामिल की गई हैं, लगभग उन सभी में यूनीकोड  के माध्यम से टाइप करने की व्यवस्था और सुविधा उपलब्ध है।

संक्षेप में हम कह सकते हैं कि यूनीकोड Unicode एक टेक्नोलॉजी मानक है। यूनीकोड  मानक में विश्वस्तर पर प्रचलित सभी लिपियों के वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर के लिए यूनिक कोड प्रदान किया गया है। यूनीकोड  (Unicode) प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष संख्या प्रदान करता है, चाहे कोई भी कम्प्यूटर प्लेटफॉर्म, प्रोग्राम अथवा कोई भी भाषा हो।

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यूनीकोड  के आगमन से हिंदी टाइपिंग न जानने वाले भी हिंदी में टाइप कर सकते हैं। आप यह जो लेख पढ़ रहे हैं यह भी यूनीकोड  के माध्यम से (फोनेटिक की-बोर्ड के माध्यम से) टाइप किया गया है।  

यूनीकोड  : तकनीकी परिचय

यूनीकोड Unicode अंग्रेजी के दो शब्दों, यूनीवर्सल (जागतिक) एवं कोड (कूट संख्या) से गठित एक नया शब्द है। अतः यूनीकोड का मतलब एक ‘विशेष कूट संख्या’ से है। यूनीकोड शब्द कंप्यूटर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रचलित है। इसे यूनीवर्सल कोड भी कहते हैं। कंप्यूटर कार्यक्रम के अंतर्गत यूनीकोड प्रत्येक वर्ण के लिए एक विशेष अंक प्रदान करता है, चाहे कोई भी प्लेटफॉर्म हो, चाहे कोई भी प्रोग्राम हो, चाहे कोई भी भाषा हो। यूनीकोड को व्यापक रूप से विश्वव्यापी सूचना आदान-प्रदान के मानक के रूप में स्वीकार किया जा चुका है।

यह 16 बिट (2 बाइट) का कोड है। इसे ही यूनीकोड मानक माना गया है। यूनीकोड 16-बिट एनकोडिंग का प्रयोग करता है जो कि 65536 कोड-प्वाइंट (वर्ण) उपलब्ध कराता है। 16 बिट यूनीकोड में 65536 वर्णों (कैरेक्टरों) की उपलब्धता होने के कारण यह कोड विश्व की लगभग सभी लेखनीबद्ध भाषाओं के लिए सभी कैरेक्टरों को एनकोड करने की क्षमता रखता है। यूनीकोड मानक कैरेक्टर के बारे में सूचना और उनका उपयोग बताते हैं।

उन सभी कंप्यूटर उपभोक्ताओं के लिए जो बहुभाषी टेक्स्ट (पाठ) पर काम करते हैं, व्यापारियों, भाषाविदों, अनुसंधानकर्ताओं, वैज्ञानिकों, गणितज्ञों और तकनीशियनों के लिए यूनीकोड मानक बहुत लाभप्रद है। यूनीकोड  मानक (स्टैन्डर्ड) प्रत्येक कैरेक्टर को एक विलक्षण संख्यात्मक मान और नाम देता है। यह अंतरराष्ट्रीय मानक है । इससे हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में कंप्यूटर पर अंग्रेजी की तरह ही सरलता से और शतप्रतिशत शुद्धता से कार्य किया जा सकता है ।

आंतरिक तौर पर कंप्यूटर केवल द्विआधारी (बाइनरी) कूट अंकों (0 और 1) को ही समझता है। इसलिए हम जो भी वर्ण टाइप करते हैं वह अंततः 0 और 1 में ही परिवर्तित किए जाते हैं, तभी कंप्यूटर उन्हें समझ पाता है। किस भाषा के किस शब्द के लिए कौन-सा अंक प्रयुक्त होगा इसका निर्धारण करने के नियम विभिन्न कैरेक्टर-सैट (Character set) या संकेत-लिपि प्रणाली (Encoding System) द्वारा निर्धारित होते हैं। ये प्रत्येक वर्ण के लिए एक अंक निर्धारित करके वर्ण संग्रहीत करते हैं। यूनीकोड का आविष्कार होने से पहले, ऐसे अंक देने के लिए सैकड़ों विभिन्न संकेत-लिपि प्रणालियां थीं।

किसी एक संकेत लिपि में पर्याप्त वर्ण नहीं है। उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ को अकेले ही, अपनी सभी भाषाओं के वर्णों को संग्रहीत करने के लिए विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है। यहाँ तक कि अंग्रेजी जैसी भाषा के लिए भी सभी वर्णों, विरामचिन्हों और सामान्य प्रयोग के तकनीकी प्रतीकों हेतु एक ही संकेत-लिपि पर्याप्त नहीं थी।

इन संकेत लिपियों में आपस में तालमेल भी नहीं है। इसीलिए दो संकेत-लिपियां दो विभिन्न वर्णों के लिए, एक ही अंक प्रयोग कर सकती हैं, अथवा समान वर्ण के लिए विभिन्न अंकों का प्रयोग कर सकती हैं। किसी भी कंप्यूटर को विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है; फिर भी जब दो भिन्न संकेत लिपियों अथवा प्लेटफॉर्मों के बीच डाटा भेजा जाता है तो उस डाटा के हमेशा खराब होने का जोखिम रहता है।

कंप्यूटर पर यूनीकोड समर्थित की-बोर्ड

कंप्यूटरों में हिंदी में कार्य करने के लिए निम्नलिखित 3 की-बोर्ड के विकल्प उपलब्ध हैं:-

इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ कार्यालय केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान, नई दिल्ली द्वारा केंद्र सरकार के अधिकारियों को इसी की-बोर्ड पर हिंदी टाइपिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में आजकल इसी की-बोर्ड ले-आउट पर परीक्षा पास करना होता है । इसे सीखने के लिए विधिवत् प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ती है।  

वस्ताव में डी.ओ.इ.फोनेटिक ले-आउट इ को इन्स्क्रिप्ट ले-आउट  कहते हैं। इस ले-आउट  का मानकीकरण भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग DOE (Department of Electronics) द्वारा किया गया तथा “ब्यूरो ऑफ इण्डियन स्टैंडर्ड्स” (BIS) द्वारा इसे राष्ट्रीय मानक घोषित किया गया। इस ले-आउट  की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सभी भारतीय भाषाओं के वर्णों के लिए प्रयुक्त कुंजियों में समरूपता रखता है अर्थात् कुंजीपटल की कुंजी ‘K’ सभी भारतीय भाषाओं के लिए वर्ण ‘क’ की कुंजी रहेगी।

इंस्क्रिप्ट टंकण शैली का सिद्धांत इस प्रकार से है (The way you pronounce, the way you type) अर्थात् “जिस तरह से आप पाठ का उच्चारण करते हैं, उसी तरह से (उसी वर्णक्रम में) आप टाइप करते हैं”।

इन्स्क्रिप्ट टंकण भी एक टच टाइपिंग प्रणाली है। इसके ध्वन्यात्मक (वर्णक्रम) गुण के कारण एक व्यक्ति जो कि किसी एक लिपि में इन्स्क्रिप्ट टाइपिंग जानता हो वह सभी भारतीय लिपियों में, बिना उस लिपि के ज्ञान के भी श्रुतलेखन द्वारा टाइप कर सकता है। उदाहरण – तेलुगु में राम लिखना हो या हिंदी में, दोनों दशाओं में समान कुंजियाँ दबाने से काम बन जाता है अर्थात् यदि आप देवनागरी में टाइप करना जानते हैं तो तेलुगु में भी लिख सकते हैं।

इन्स्क्रिप्ट टंकण शैली के तहत हिंदी टाइपिंग करने के लिए टंकणकर्ता को अंग्रेजी भाषा की जानकारी का होना बिल्कुल भी  आवश्यक नहीं है। एकदम अंग्रेजी का ज्ञान न रखने वाले भी इस शैली से बखूबी टंकण कार्य कर सकते हैं, परंतु टंकणकर्ता को हिंदी पढ़ना आना ज़रूरी है, क्योंकि यहाँ जो शब्द टाइप किया जाएगा वह उस उस शब्द के उच्चारण के वर्णक्रम में ही कुंजियाँ प्रयोग कर टाइप कर सकेगा।

यह सभी प्रमुख प्रचालन तंत्रों (OS) में अंतर्निर्मित (Inbuilt) आता है इसलिए किसी अलग टाइपिंग टूल को इंस्टाल करने की आवश्यकता नहीं। वे सभी नवीन उपयोगकर्ता जो कंप्यूटर पर पहले से हिंदी के लिए किसी भी प्रकार की टाइपिंग नहीं जानते, उन्हें इन्स्क्रिप्ट ही सीखना चाहिए। इन्स्क्रिप्ट का कुंजीपटल विन्यास विशेष शोध द्वारा विशिष्ट क्रम में बनाया गया है, जिससे इसे याद करना अत्यंत सरल है।

मात्र एक हफ्ते के अभ्यास से ही इन्स्क्रिप्ट में लिखना शुरू किया जा सकता है। इन्स्क्रिप्ट में आमतौर पर एक वर्ण के लिए एक कुंजी होने से टाइपिंग की अशुद्धियाँ कम होती हैं। इन्स्क्रिप्ट ले-आउट में भारतीय लिपियों के सभी यूनीकोड मानांकित चिन्हों को शामिल किया गया है। टच स्क्रीन डिवाइसों जैसे टैबलेट, पीसी, तथा मोबाइल फोन आदि के लिए भी इन्स्क्रिप्ट-की-बोर्ड पूर्णतया उपयुक्त है ।  

रेमिंग्टन की-बोर्ड

रेमिंग्टन गेल की-बोर्ड हमारे पुराने मैनुअल की-बोर्ड (पुराने टाइपराइटर के की-बोर्ड ले-आउट जैसे कि कृति देव 016 या कृति देव 010 के की-बोर्ड) की तरह काम करता है । इसमें कृति देव में टाइपिंग जानने वाले भी यूनीकोड  पर काम कर सकते हैं, क्योंकि इसका ले-आउट भी लगभग कृति देव की तरह ही है। इसे कृति देव में टाइपिंग जानने वाले बहुत आसानी से प्रयोग कर सकते हैं और यूनीकोड  में टाइप कर सकते हैं। उन्हें परेशान होने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं है । इसे भी सीखने के लिए विधिवत् प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ती है । लेकिन जो लोग कृति देव में टाइप करना जानते हैं, उन्हें इसे सीखने की आवश्यकता नहीं पड़ती है । इसके साथ ही ऑनलाइन फॉन्ट कन्वर्टर की सहायता से कृति देव फोंट्स को मंगल फोंट्स या अन्य यूनीकोड  समर्थित फोंट्स में परिवर्तित भी किया जा सकता है ।   

वास्तव में टाइप राइटर ले-आउट को ही प्राय: रेमिंग्टन टाईप राइटर के नाम से  जाना जाता है। इसका ले-आउट हिंदी टाईप-राईटर (टाइपिंग मशीन) पर आधारित है। यह काफी पुराना और बहु- प्रचलित ले-आउट  है। यह ले-आउट  उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्होंने कम्प्यूटर पर आने से पूर्व ही इस ले-आउट पर टाइपिंग सीखी है या पहले से ही इस पर टाइपिंग करने के आदी हैं।

रेमिंग्टन टंकण शैली से यहाँ अभिप्राय यह है कि हिंदी शब्द को टंकित करने के लिए टंकणकर्ता किस क्रम में कुंजियों का उपयोग करता है। रेमिंग्टन की टंकण शैली का सिद्धांत इस प्रकार से है (The way you see, the way you type) अर्थात् “जिस तरह से आपको पाठ दिखता है, उसी तरह से (उसी वर्णक्रम में) आप टाइप करते हैं”।

रेमिंग्टन एक टच टाइपिंग प्रणाली है। टच टाइपिंग एक टंकण विधि है, जिसमें की-बोर्ड को बिना देखे केवल हाथों से छूकर टाइप किया जाता है । यह हिंदी टाइपिंग की सबसे पुरानी विधि है । यह उन प्रयोगकर्ताओं के लिए एकदम सही और उपयोगी है जिन्होंने पहले से हिंदी टाइपराइटर पर हिंदी टाइपिंग सीखी है तथा इसके अभ्यस्त हैं। यह विधि अब काफी हद तक समयातीत (आउट-डेटेड) हो चुकी है तथा नए सिरे से हिंदी टाइपिंग सीखने वालों के लिए उपयोगी नहीं है। आजकल इसका प्रयोग मुख्य रूप से नॉन-यूनीकोड ग्राफिक्स तथा डीटीपी (डेस्कटॉप पब्लिशिंग) प्रोग्रामों में किया जाता है।

रेमिंग्टन टंकण शैली के तहत हिंदी टाइपिंग करने के लिए टंकणकर्ता को अंग्रेजी भाषा की जानकारी का होना बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है। एकदम अंग्रेजी का ज्ञान न रखने वाले भी इस शैली से बखूबी टंकण कार्य कर सकते हैं।

फोनेटिक की-बोर्ड

यह सर्वाधिक प्रचलित की-बोर्ड है । इसके माध्यम से हम अंग्रेजी के की-बोर्ड ले-आउट  (हमारा सामान्य की-बोर्ड जो हर डेस्कटॉप और लैपटाप में होता है) की सहायता से टाइप करके हिंदी में टाइप कर सकते हैं।  अर्थात् आप टाइप तो अंग्रेजी (रोमन लिपि) में ही करेंगे लेकिन आपको आउटपुट हिंदी (देवनागरी लिपि) में मिलेगा।  

इस बात का विशेष ध्यान रखें कि यह की-बोर्ड केवल लिपि में परिवर्तन करता है । यह रोमन लिपि को देवनागरी लिपि में परिवर्तित करता है। इस प्रक्रिया को लिप्यंतरण (Transliteration) कहते हैं । यह की-बोर्ड अनुवाद (Translation) नहीं करता है ।

इसमें टाइपिंग सीखने के लिए किसी भी प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ती है । अंग्रेजी के की-बोर्ड का प्रयोग करने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसका बहुत आसानी से प्रयोग कर सकता है । यह सर्वाधिक प्रचलित और अत्यंत लोकप्रिय की-बोर्ड है । इसमें टाइप करने कि प्रक्रिया को नीचे उल्लिखित उदाहरण से बहुत अच्छी तरह से समझ जा सकता है :

उदाहरण : Rahul ek kitab padh raha hai. Wah upanyas samrat munshi premchand kaa prasiddha upanyas ‘Godan’ padh raha hai. (यह रोमन लिपि में लिखा गया है)।

फोनेटिक लिप्यंतरण :  राहुल एक किताब पढ़ रहा है । वह उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास ‘गोदान’ पढ़ रहा है । (यह देवनागरी लिपि में लिखा गया है ) ।  

फोनेटिक इंग्लिश ले-आउट को रोमनाइज्ड ले-आउट कहते हैं। इसका ध्वन्यात्मक लिप्यंतरण आधारित की-बोर्ड ले-आउट कंप्यूटर का वास्तविक की-बोर्ड ले-आउट  आउट है । ध्वन्यात्मक लिप्यंतरण (फोनेटिक ट्रॉसलिट्रेशन) मशीनी लिप्यंतरण की एक विधि है। यह एक लिप्यंतरण विधि है, जिससे कि हिंदी आदि भारतीय लिपियों को आपस में तथा रोमन में बदला जाता है। इसकी कोई मानक लिप्यंतरण स्कीम नहीं होती। अलग-अलग टूल में अलग अलग स्कीम का प्रयोग होता है।

फोनेटिक इंग्लिश (रोमनाइज्ड) आधारित टंकण शैली में प्रयोक्ता हिंदी (अथवा कोई इंडिक) टेक्स्ट को रोमन लिपि में टाइप करता है तथा यह रियल टाइम में समकक्ष देवनागरी (अथवा इंडिक लिपि) में ध्वन्यात्मक रूप से परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार का स्वचालित परिवर्तन ध्वन्यात्मक टेक्स्ट एडिटर, वर्ड प्रोसेसर तथा सॉफ्टवेयर प्लगइन के द्वारा किया जाता है। परन्तु सर्वश्रेष्ठ तरीका फोनेटिक आइ.एम.ई. का प्रयोग है, जिसकी सहायता से टेक्स्ट किसी भी एप्लिकेशन में सीधे ही लिखा जा सकता है।

लेकिन इस टंकण शैली में कार्य करने के लिए प्रयोगकर्ता को अंग्रेजी का अच्छा-खासा ज्ञान होना आवश्यक है। यह कंप्यूटर के उन प्रयोगकर्ताओं के लिए बेहतर है, जो पहले से ही अंग्रेजी की टाइपिंग जानते हैं और हिंदी में टाइप करना चाहते हैं।

यूनीकोड की आवश्यकता क्यों है?

यूनीकोड Unicode मानक सार्विक करैक्टर इनकोडिंग मानक है जिसका प्रयोग कंप्यूटर प्रोसेसिंग के लिए टेक्स्ट के निरूपण के लिए किया जाता है। कंप्यूटर पर एकरूपता के लिए एकमात्र विकल्प कैरेक्टर इनकोडिंग के लिए यूनीकोड  है।

इससे हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में कंप्यूटर पर अंग्रेजी की तरह ही सरलता से 100% कार्य किया जा सकता है, कंप्यूटर पर हिंदी में सभी कार्य जैसे – वर्ड प्रोसेसिंग, डाटा प्रोसेसिंग, ई-मेल, वेबसाइट निर्माण आदि किए जा सकते हैं।  हिंदी में बनी फाइलों का आसानी से आदान-प्रदान कर सकते हैं ।

कुछ समय पूर्व यह समस्‍या थी कि किसी वेबसाइट पर हिंदी में उपलब्ध सामग्री को पढ़ने के लिए कम्‍प्‍यूटर में उस वेबसाइट से संबंधित फॉन्ट को डाउनलोड करना होता था इसके बाद ही हम उस वेबसाइट पर उपलब्ध सामग्री को पढ़ पाते थे। फिर भी उसमें बहुत सारी कमियाँ होती थीं। लेकिन यूनीकोड  के आने से आपको कोई फॉन्ट डाउनलोड करने की आवश्‍यकता नहीं होती है। आप किसी भी वेबसाइट पर हिंदी में उपलब्ध सामग्री को आराम से पढ़ सकते हैं। गूगल, फायर फॉक्स, बिंग अथवा किसी भी अन्य सर्च इंजन पर हिंदी में टाइप करके कुछ भी हिंदी में सर्च कर सकते हैं।

हमारे दैनिक जीवन में हिंदी भाषा के प्रयोग में यूनीकोड का महत्व तथा लाभ

1. एक ही दस्तावेज में अनेकों भाषाओं के टेक्स्ट (text) लिखे जा सकते है। उदाहरण के लिए यदि आप हिंदी में कोई दस्तावेज़ टाइप कर रह रहे हैं और बीच में ही अंग्रेजी (रोमन लिपि) में कुछ टाइप करना हो तो उसी दस्तावेज़ में तुरंत अंग्रेजी में टाइप करना शुरू कर सकते हैं । इसका अर्थ यह है कि एक ही दस्तावेज़ में तुरंत हिंदी से अंग्रेजी या अंग्रेजी से हिंदी में टाइप करना शुरू कर सकते हैं ।

2. किसी सॉफ्टवेयर-उत्पाद का एक ही संस्करण पूरे विश्व में चलाया जा सकता है। क्षेत्रीय बाजारों के लिए अलग से संस्करण निकालने की ज़रूरत नहीं पड़ती ।

3. आप बिना हिंदी टाइपिंग सीखे हिंदी में टाइप कर सकते हैं । 

4. आप किसी भी सर्च इंजन जैस गूगल, मोजाइला फायरफॉक्स इत्यादि में हिंदी में टाइप करके कुछ भी सर्च कर सकते हैं। कृति देव जैसे फोंट्स में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है ।

5. आप हिंदी में ई-मेल भेज सकते हैं। 

6. कम्‍प्‍यूटर में विभिन्‍न फाइलों और फोल्‍डरों के नाम अंग्रेजी की तरह हिंदी में बहुत आसानी से रख सकते हैं। अर्थात अपनी फाइलों और फोल्डर का नामकरण हिंदी में कर सकते हैं ।

7. फेसबुक, व्हाट्स अप, यूट्यूब, इत्यादि सोशल मीडिया पर हिंदी में चैटिंग कर सकते हैं, अपने कमेंट्स हिन्दी में लिख सकते हैं  । 

8. अंग्रेजी की तरह ही हिंदी में भी बहुत आसानी से अपना स्वयं का वेबसाइट या ब्लॉग बना सकते हैं।

9. एमएस वर्ड और एमएस एक्सेल में हिंदी में टाइप कर सकते हैं।  

10. फेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल नेटवर्किंग साइटों पर आसानी से हिंदी में लिख सकते हैं। 

11. यूनीकोड  में टाइप की गई या लिखी हुई किसी भी पाठ्य सामग्री को आसानी से अन्य भाषाओं में अनुवादित (Translate) किया जा सकता है।

12. इससे विभिन्न तरह के अस्की फ़ॉन्ट्स से छुटकारा मिलता है ।

13. कार्यालयों के सभी कार्य आसानी से हिंदी में किए जा सकते हैं । इससे हार्ड फ़ाइलों के साथ-साथ ई-ऑफिस प्लेटफ़ॉर्म पर भी हिंदी में आसानी से सभी कार्य किए जा सकते हैं ।

14. हिंदी में बनी फ़ाइलों का आसानी से आदान-प्रदान कर सकते हैं ।

15. हिंदी की-वर्ड को गूगल या किसी अन्य सर्च इंजन में आसानी से सर्च कर सकते हैं ।

भारत में केंद्र सरकार के कार्यालयों में ई-ऑफिस में कार्य करने के लिए यूनीकोड  का महत्व :

केंद्र सरकार के लगभग सभी कार्यालयों में अब ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर दिया गया है । ई-ऑफिस प्रणाली में हिंदी में किया जाने वाला सभी कार्य यूनीकोड  के माध्यम से ही किया जाता है ।  भारत सरकार द्वारा यूनीकोड  को अपने सभी कार्यालयों में अनिवार्य कर दिया गया है, भारत सरकार की सभी वेबसाइटों पर यूनीकोड  का प्रयोग किया जा रहा है। यहाँ तक कि नई भर्तियों के लिए अभ्‍यर्थियों को यूनीकोड  फॉन्ट (इन्स्क्रिप या रेमिंग्टन की-बोर्ड के माध्यम से टाइप करना) में टाइपिंग टेस्‍ट भी अनिवार्य कर दिया गया है। अर्थात् यदि आप केंद्र सरकार की नौकरी (अवर श्रेणी लिपिक, कर सहायक इत्यादि, क्लर्क, टाइपिस्ट इत्यादि की तैयारी कर रहे हैं तो यूनीकोड  टाइपिंग अवश्‍य सीखें।

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एनकोडिंग की एकरूपता को ध्यान में रखते हुए सभी केंद्रीय कार्यालय को कंप्यूटरों में यूनीकोड  एनकोडिंग प्रणाली अथवा यूनीकोड  समर्थित ओपन टाइप फोंट का ही प्रयोग करने का निदेश दिया है। परंतु, कंप्यूटर परिचालन से संबंधित छोटी-छोटी जानकारी के अभाव में कई केंद्रीय कार्यालय इस नि:शुल्क सुविधा की जगह विभिन्न प्रकार के फोंट और बहुभाषी सॉफ्टवेयरों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे सूचना हस्तांतरण में तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस कारण हिंदी की फाइलों को, अंग्रेजी की तरह आसानी से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर, आदान-प्रदान (transfer) नहीं कर पाते हैं । हिंदी पाठ (text) को दूसरे सॉफ्टवेयर में जोड़ने (paste) में भी समस्या आती है। अत: भारत सरकार के द्वारा केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय एवं अधीनस्थ कार्यालय/उपक्रम/सरकारी कार्यालय को यह निदेश दिया गया है कि केवल यूनीकोड  समर्थित फोंट एवं यूनीकोड  एनकोडिंग के अनुरूप सॉफ्टवेयर का ही प्रयोग करें ।

मुझे पूरा विश्वास है कि इस लेख को पढ़ने के बाद यूनीकोड  के अनुप्रयोग के संबंध में आप लोगों को सारगर्भित जानकारी मिल गई होगी । सन् 2000 के बाद जो भी ऑपरेटिंग सिस्टम्स आ रहे हैं उनमें यूनीकोड  के माध्यम से हिंदी में टाइप करने की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया इस सुविधा का लाभ उठाएं और अपना अधिक से अधिक कार्य हमारी राजभाषा हिंदी में ही करना सुनिश्चित करें।

निष्कर्ष

अंततः यह कहा जा सकता है कि यूनीकोड Unicode केवल कंप्यूटर पर अक्षरों को प्रदर्शित करने की एक तकनीकी व्यवस्था नहीं, बल्कि भाषाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण क्रान्तिकारी तकनीक है। यूनीकोड के आगमन ने हिंदी सहित विश्व की अनेक भाषाओं के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं। इसके कारण भाषा, लिपि और तकनीक के बीच मौजूद अनेक बाधाएँ काफी हद तक समाप्त हुई हैं तथा आज हिंदी में लिखना, पढ़ना, सुरक्षित रखना, साझा करना और इंटरनेट पर खोज करना पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सरल और सहज हो गया है।

विशेष रूप से हिंदी के संदर्भ में यूनीकोड का महत्व अत्यंत व्यापक है। इसने हिंदी को कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट, ई-मेल, सोशल मीडिया, वेबसाइट, ब्लॉग, ई-ऑफिस और डिजिटल संचार का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। अब हिंदी में तैयार की गई सामग्री किसी विशेष कंप्यूटर, फॉन्ट या सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विभिन्न उपकरणों और प्लेटफॉर्मों पर आसानी से उपयोग की जा सकती है। यही विशेषता हिंदी को डिजिटल युग में अधिक सक्षम, सुलभ और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

यूनीकोड के साथ उपलब्ध इन्स्क्रिप्ट, रेमिंग्टन और फोनेटिक जैसे कीबोर्ड विकल्पों ने हिंदी टंकण को भी आम उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाजनक बनाया है। विशेषकर फोनेटिक टंकण के माध्यम से वे लोग भी सहजता से हिंदी में लिख पा रहे हैं, जिन्हें पारंपरिक हिंदी टाइपिंग का ज्ञान नहीं है।

आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, तब हिंदी को केवल साहित्य और संचार की भाषा के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रशासन, शिक्षा, तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था की भाषा के रूप में भी आगे बढ़ाना आवश्यक है। इस दिशा में यूनीकोड ने एक मजबूत आधार प्रदान किया है। इसलिए आवश्यकता केवल यूनीकोड की तकनीकी उपयोगिता समझने की नहीं, बल्कि इसे अपने दैनिक, शैक्षिक और कार्यालयीन कार्यों में अधिकाधिक अपनाने की भी है।

निस्संदेह, यूनीकोड ने हिंदी को डिजिटल दुनिया में नई पहचान, नई गति और नई संभावनाएँ प्रदान की हैं। हिंदी का भविष्य जितना उसके समृद्ध साहित्य में है, उतना ही उसके आधुनिक तकनीकी प्रयोग में भी है। अतः हिंदी को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना वास्तव में भाषा को भविष्य के लिए सशक्त बनाना है।

यूनीकोड से संबंधित 10 महत्वपूर्ण FAQs

प्रश्न 1. यूनीकोड क्या है? Unicode Kya Hai ?

उत्तर : यूनीकोड एक अंतरराष्ट्रीय कैरेक्टर-एन्कोडिंग मानक है, जिसमें विश्व की विभिन्न भाषाओं और लिपियों के प्रत्येक वर्ण को एक विशिष्ट कोड प्रदान किया जाता है। इसके कारण हिंदी सहित अनेक भाषाओं में लिखी गई सामग्री को विभिन्न कंप्यूटर, मोबाइल, सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सही रूप में प्रदर्शित और साझा किया जा सकता है।

प्रश्न 2. हिंदी के लिए यूनीकोड का क्या महत्व है?

उत्तर : यूनीकोड ने हिंदी को डिजिटल दुनिया में व्यापक रूप से उपयोग करने योग्य बनाया है। इसके माध्यम से हिंदी में वेबसाइट, ब्लॉग, ई-मेल, दस्तावेज, सोशल मीडिया पोस्ट, ई-ऑफिस और अन्य डिजिटल सामग्री आसानी से तैयार की जा सकती है।

प्रश्न 3. क्या यूनीकोड एक फॉन्ट है?

उत्तर : नहीं। यूनीकोड स्वयं कोई फॉन्ट नहीं, बल्कि एक मानक कैरेक्टर-एन्कोडिंग प्रणाली है। यह प्रत्येक वर्ण को एक विशिष्ट कोड प्रदान करती है। हिंदी को प्रदर्शित करने के लिए यूनीकोड समर्थित फॉन्ट जैसे मंगल आदि का प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 4. हिंदी में यूनीकोड टाइप करने के लिए कौन-कौन से की-बोर्ड उपलब्ध हैं?

उत्तर : हिंदी में यूनीकोड टाइप करने के लिए मुख्य रूप से इन्स्क्रिप्ट, रेमिंग्टन और फोनेटिक की-बोर्ड का प्रयोग किया जाता है। फोनेटिक की-बोर्ड में अंग्रेजी के अक्षरों की सहायता से हिंदी शब्द टाइप किए जाते हैं और उनका परिणाम देवनागरी में दिखाई देता है।

प्रश्न 5. क्या फोनेटिक की-बोर्ड से हिंदी टाइप करने के लिए हिंदी टाइपिंग सीखना जरूरी है?

उत्तर : फोनेटिक की-बोर्ड का प्रयोग करने के लिए पारंपरिक हिंदी टाइपिंग सीखना आवश्यक नहीं है। यदि उपयोगकर्ता अंग्रेजी कीबोर्ड से परिचित है, तो वह रोमन अक्षरों में हिंदी शब्दों का उच्चारण लिखकर आसानी से देवनागरी में हिंदी टाइप कर सकता है।

प्रश्न 6. यूनीकोड और कृति देव फॉन्ट में क्या अंतर है?

उत्तर : यूनीकोड एक मानकीकृत कैरेक्टर-एन्कोडिंग प्रणाली है, जबकि कृति देव एक पुराने नॉन-यूनीकोड फॉन्ट-आधारित लेखन प्रणाली से संबंधित है। यूनीकोड टेक्स्ट को विभिन्न आधुनिक सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करना और उपयोग करना अधिक सुविधाजनक होता है।

प्रश्न 7. क्या यूनीकोड में हिंदी वेबसाइट और ब्लॉग बनाए जा सकते हैं?

उत्तर : हाँ। यूनीकोड के कारण हिंदी में वेबसाइट और ब्लॉग बनाना पूरी तरह संभव है। आज हिंदी की वेबसाइटों, ब्लॉगों और ऑनलाइन सामग्री को विभिन्न कंप्यूटर, मोबाइल और वेब ब्राउजर पर बिना किसी विशेष हिंदी फॉन्ट को अलग से इंस्टॉल किए पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 8. सरकारी कार्यालयों में यूनीकोड का क्या महत्व है?

उत्तर : सरकारी कार्यालयों में हिंदी के डिजिटल कार्यों के लिए यूनीकोड अत्यंत महत्वपूर्ण है। ई-ऑफिस, सरकारी दस्तावेज, वेबसाइट, ई-मेल तथा अन्य डिजिटल कार्यों में यूनीकोड समर्थित हिंदी सामग्री का प्रयोग सूचना के आदान-प्रदान और विभिन्न प्रणालियों के बीच अनुकूलता के लिए उपयोगी है।

प्रश्न 9.यूनीकोड के क्या प्रमुख लाभ हैं?

उत्तर : यूनीकोड के प्रमुख लाभों में हिंदी और अन्य भाषाओं में डिजिटल लेखन, वेबसाइट और ब्लॉग निर्माण, ई-मेल, सोशल मीडिया पर हिंदी का प्रयोग, फाइलों का आदान-प्रदान, सर्च इंजन में हिंदी खोज, बहुभाषी दस्तावेज तैयार करना तथा विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टेक्स्ट की एकरूपता बनाए रखना शामिल है।

प्रश्न 10. क्या आज हिंदी टाइपिंग सीखने वालों के लिए यूनीकोड सीखना आवश्यक है?

उत्तर : हाँ, डिजिटल युग में हिंदी में नियमित रूप से काम करने वाले लोगों के लिए यूनीकोड की जानकारी अत्यंत उपयोगी है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, अनुवादकों, सरकारी कर्मचारियों, ब्लॉगर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यूनीकोड आधारित हिंदी टाइपिंग सीखना उनके डिजिटल कार्य को अधिक आसान और प्रभावी बना सकता है।

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